Friday, June 21, 2019

2015中英文化交流年 第二届全球中国对话:超文化与新型全球治理

2015年是中英文化交流年,在中英文化交流史上具有重要的意义。中英两国在对方国家举办一系列高水平的文化活动,并均以“创意/创造(creativity)”作为各自文化季的主题,以进一步加强两国的文化交流和产业合作,增进两国人民的相互了解和友谊。
第二届全球中国对话于中英文化交流年期间举办意义重大。这次活动将以“超文化和新型全球治理” 为主题展开对话与交流, 诸多领域国际著名学者和对全球事务具有影响力的人物将参加对话。会上将创刊《中国比较研究》双语期刊,介绍超文化与新型全球治理,展开若干主题的对话与讨论,如超文化和比较视野下的“文明的对话”,中欧可持续城镇化研究,英国的学校治理、全球超文化教育与学习,以及社会创造、超文化及其新型全球治理。来自中国、美国、法国、比利时和英国等诸多领域国际著名学者和对全球事务具有影响力的人物参加对话。
这次活动将由全球中国比较研究会、英国威斯敏斯特大学中国传媒中心、中国复旦大学发展学院和全球青年企业家协会联合主办,它得到了中国驻英大使馆文化处、英国文化委员会、英国社会学会、中国世界政治研究会等机构、学术团体和参与活动的所有支持和赞助单位的鼎力相助。
  •  演讲嘉宾
  1. 马丁·阿尔布劳(Martin Albrow)教授,英国社会科学院院士;英国社会学会名誉副主席
  2. 邴正教授,中国吉林大学常务副校长;中国社会学会副会长
  3. 凯利·布朗教授,英国伦敦国王学院中国研究中心主任
  4. 科林·布拉德福德(Colin Bradford)博士,美国布鲁金斯学会高级研究员
  5. 皮埃尔•卡蓝默(Pierre Calame)先生, 瑞士梅耶人类进步基金会主席; 法国中欧社会论坛创始人
  6. 克莱门特 – 琼斯(Timothy Clement-Jones)勋爵,英国议会跨党派中国小组副主席
  7. 英格丽·克兰菲尔德(Ingrid Cranfield)女士, 全球中国比较研究会理事,英国伦敦恩菲尔德市前副市长
  8. 吉尔•德拉诺瓦(Gil Delannoi)教授,法国巴黎政治学院政治研究中心主任
  9. 范丽珠教授,复旦大学社会发展与公共政策学院
  10. 冯琰博士, 英国威斯敏斯特大学中国传媒中心访问学者;中国传媒大学讲师
  11. 查尔斯·格兰特(Charles Grant) 先生,欧洲改革中心主任;全球中国比较研究会信托人
  12. 郝斐,全球青年企业家协会 会长; 英国UVIC 集团总裁
  13. 伊莎贝尔•希尔顿(Isabel Hilton)女士,中外对话创始人、主编
  14. 斯科特·拉什(Scott Lash)教授,伦敦大学哥德史密斯学院文化研究中心主任
  15. 孔令涛先生,孔子国际教育集团董事长、世界孔子基金会主席
  16. 柳宏教授,扬州大学文学院院长
  17.  刘晓明先生,中国驻英使馆大使
  18.  毛里奇奥•马里内利 (Maurizio Marinelli) 博士,英国萨塞克斯大学亚洲中心主任
  19.  阿洛克·夏尔马 (Alok Sharma)先生,英国国会下议院议员; 东西方领袖论坛创始人
  20.  山姆·威敏斯特 (Sam Whimster) 教授, 《韦伯研究》主编; 伦敦都市大学全球政策研究所文化与现代化项目主任
  21.  姚文放教授,中国扬州大学文学院
  22.  于硕教授,香港理工大学中欧超文化对话中心代表; 法国中欧社会论坛共同创始人
  23. 通过跨文化的对话,寻找全球化语境下的新知识、新范式,以更好应对全球治理面临的挑战,并探索互利互惠、共生共存共荣的可能
  24. 推动各国与中国的学术研究机构和智库的合作,共同关注“全球化与中国”话题下的学术、理论和方法,建立各机构和智库之间的合作机制

Monday, June 17, 2019

विश्व कप 2019: क्या पाकिस्तान अब क्रिकेट में बहुत पीछे रह गया है?

इंग्लैंड में जारी आईसीसीसी विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट में बीते रविवार को भारत ने जिस आसानी से चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को मात दी उसका अंदाज़ा शायद ही किसी को रहा होगा.
अब इसे लेकर चर्चा हो सकती है कि जिस पाकिस्तान ने इसी विश्व कप में ख़िताब की दावेदार मानी जा रही मेज़बान इंग्लैंड को आसानी से हराया आख़िरकार उसी पाकिस्तान ने भारत के सामने इतनी आसानी से घुटने कैसे टेक दिए.
मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफ़र्ड मैदान में जब पाकिस्तान के कप्तान सरफ़राज़ अहमद ने टॉस जीतकर पहले फिल्डिंग करने का फ़ैसला किया तभी सभी के मन में पहला विचार यही आया कि उन्होंने यह क्या किया.
सरफ़राज़ अहमद के उस फ़ैसले का फ़ायदा उठाते हुए भारत ने रोहित शर्मा के शानदार शतक की मदद से निर्धारित 50 ओवर में पांच विकेट खोकर 336 रन बना डाले.
पहले तो पाकिस्तान के गेंदबाज़ नहीं चले और उसके बाद उसके बल्लेबाज़ भी नौसिखिए की तरह एक के बाद एक विकेट गंवाकर बारिश से प्रभावित मैच में डकवर्थ लूइस नियम के आधार पर 89 रन से हार गए.
इन तमाम बातों को लेकर क्रिकेट समीक्षक विजय लोकपल्ली मानते है, "हर बार की तरह इस बार भी भारत-पाकिस्तान के मुक़ाबले को लेकर बहुत शोर शराबा हुआ. लेकिन मैच के नतीजे से यह साबित हो गया कि दोनो टीमों में बहुत अंतर है. पाकिस्तान क्रिकेट में बहुत पीछे रह गया है. क्रिकेट में भारत की तरक्की उसके खेल में दिखती है. इसके बावजूद पाकिस्तान का पतन क्रिकेट के लिए ठीक नही है."
विजय लोकपल्ली यह भी मानते हैं कि इसका अर्थ यह भी नहीं है कि अगर भारत हारेगा तभी विश्व क्रिकेट अच्छा होगा.
अब अगर मैच की बात करें तो भारत के पास विश्वस्तरीय खिलाड़ी है दूसरी तरफ़ पाकिस्तान के केवल मोहम्मद आमिर ने कुछ अच्छी गेंदबाज़ी की.
बल्लेबाज़ी में फ़ख़र ज़मां, बाबर आज़म और दूसरे खिलाड़ी अच्छे ज़रूर हैं लेकिन पाकिस्तान को इस हार से उबरने में बहुत समय लगेगा.
इसके अलावा टॉस जीतकर पहले फ़ील्डिंग करने के पाकिस्तान के कप्तान सरफ़राज़ अहमद के फ़ैसले को लेकर विजय लोकपल्ली कहते हैं कि उस समय तो यह निर्णय ठीक लग रहा था.
अगर भारत टॉस जीत जाता तो वह भी शायद यही करता लेकिन रोहित शर्मा और केएल राहुल ने बहुत शानदार बल्लेबाज़ी की.
दूसरी तरफ़ अगर पाकिस्तान को शुरू में कुछ विकेट मिल जाते तो यक़ीनन मैच का रुख़ कुछ और होता.
वैसे भी जब किसी टीम को अच्छी शुरुआत मिल जाए तो फिर बाद में हालात को संभालना आसान हो जाता है और उसी का फ़ायदा उठाते हुए विराट कोहली ने भी शानदार बल्लेबाज़ी की.
विजय लोकपल्ली मानते हैं कि कुल मिलाकर भारतीय टीम और उनकी योजना बेहद मज़बूत थी. विराट कोहली ने दूसरे बल्लेबाज़ों को स्ट्राइक भी दी और रन की रफ़्तार भी बनाए रखी.
वैसे पाकिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ भी टॉस जीतकर पहले फिल्डिंग करने का फ़ैसला किया और हारा. तो क्या पुरानी ग़लती से पाकिस्तान के कप्तान ने कोई सबक़ नहीं सीखा.
इसे लेकर विजय लोकपल्ली मानते हैं कि अब मैच के बाद कुछ भी कहा जा सकता है, जैसा कि श्रीलंका ने शिकायत की कि उन्हें तेज़ पिच दी जा रही है, दूसरी तरफ़ आईसीसी की कोशिश है कि फ्लैट पिच बनाई जाई. इससे दर्शक और प्रसारणकर्ता दोनों को लाभ होता है, पूरे 50 ओवर देखने को मिलते हैं.
उनका उद्देश्य होता है कि जो टीम पहले खेले वह पूरे 50 ओवर खेले और बाद वाली टीम भी कम से कम 45 ओवर खेले.
विजय लोकपल्ली कहते हैं कि भारत-पाक मैच में पिच में कोई दम नहीं था. वहीं पाकिस्तान की गेंदबाज़ी में भी दम नही था. रविवार के मैच के बाद पाकिस्तान को बहुत सोचना होगा क्योंकि कहीं भी लगा नहीं कि वह विश्व कप क्रिकेट की टीम है.
इसी बात को आगे बढ़ाते हुए विजय लोकपल्ली कहते हैं कि ऐसा लगता है कि पाकिस्तान अच्छे तेज़ गेंदबाज़ और बल्लेबाज़ के लिए जूझ रहा है.
विश्व कप से पहले इंग्लैंड के ख़िलाफ़ कुछ मैचों में पाकिस्तान ने 300 या उससे अधिक रन बनाए लेकिन रविवार का दिन गेंदबाज़ों के लिए ख़राब था. तेज़ गेंदबाज़ हसन अली हो या वहाब रियाज़ या फ़िर स्पिनर मोहम्मद हफीज़ या शादाब खान कोई करिश्मा नहीं दिखा पाया.
दरअसल पाकिस्तान के लिए रविवार को कुछ भी ठीक नहीं था. पहले ख़राब गेंदबाज़ी, ख़राब फ़ील्डिंग और फ़िर बेहद ख़राब बल्लेबाज़ी.
सबसे बड़ी बात उनकी कमियं बेहद आसानी से सामने उभर आईं.
विजय लोकपल्ली कहते हैं कि शुरुआत से लेकर आख़िर तक पाकिस्तान ने इतनी ग़लतियां की कि उसके समर्थक तक मैच समाप्त होने से पहले मैदान से उठकर चले गए.
यहां तक कि जब भारत के 336 रन बन गए तब शायद ही किसी को लगा हो कि भारत हारेगा.

Tuesday, May 28, 2019

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BBC中文:您自己有没有反思当年政治体制改革是否可以做更好,或者当年是否有办法避免六四的发生?
鲍:我这一辈子可以用四个字概括,一事无成。我要做的事情,没有一件事件做成功的。毛泽东时代是这样,邓小平时代也是如此,现在当然也没什么事情,一事无成。
你认为有什么办法可以让毛泽东不怕党内出赫鲁晓夫,不搞文化大革命吗?道理是一样的。如果没有办法叫毛泽东不怕出赫鲁晓夫,那也没有办法叫邓小平不怕出赫鲁晓夫。毛泽东就是怕刘少奇做秘密报告所以才发动文化大革命,所以同样,邓小平也是怕赵紫阳做秘密报告,因此从顶层设计了一个“六四”事件。唯恐天下不乱的不是学生,是邓小平。他要乱,才能至少在他在世时根除党内出赫鲁晓夫的可能性。
BBC中文:30年来六四在中国一直是禁忌。您认为是时候公开六四吗?
我曾在“六四”10周年时写过,邓小平留给后继者最大的历史遗产就是“六四”。谁只要平反了“六四”,谁就得到民心,谁就超过了邓小平,也超过了毛泽东,就可以得到人民的信任。所以这是最大的历史遗产。这件事应该是轻而易举的,一做就成功。
现在的领导人要心平气和看这个问题,不要把自己跟邓小平捆在一起,应该把自己跟邓小平切割开来。特别是当国家遇到困难,需要团结、凝结人心的时候,这是非常重要的问题,是值得郑重再三考虑的问题。他要真想摆脱现在的各种矛盾和困境,真想得到选民的信任,就应该考虑这个问题。
这种矛盾作为一个公民个人很难感受到,但作为领导人如果连这个感觉都没有,那是不可思议的。我很希望这个问题可以从“以人民为主体”解决,我很欣赏习总书记讲的以人为主体的说法。
BBC中文:您觉得习近平2012年上台以来,是真正在实践以人民为主体吗?
鲍:如果他不相信以人民为主体,那还讲以人民为主体干什么?至少说明他还没有忘掉“以人民为主体”这几个字。
习总书记“以人民为主体”的说法好像是最近几年谈的。不过我想他现在做的还不够,我希望他能够充分展现自己的抱负。当然现实的情况我完全不知道,这只是我个人没有根据的信口开河。我只能把当时了解的事情作为根据,不可能把现在的事情作为根据。
但其实我对任何人都寄予希望,对任何人都没有成见。任何人要做一件好事,我都支持,绝不拆他们的台。
我有幸曾与习主席的父亲习仲勋老先生交谈过几次,很赞成习仲勋老先生“要保护不同意见”的主张。其实保护不同意见这个事情只是在中国的特殊情况下才会提出。不同意见本身当然会存在,就是有不同意见才开会,才征求意见。再比如说,为什么要有舆论,就是要有批评与反批评,没有不同意见还要批评与反批评干什么?所以没有不同意见等于说没有脑袋,就是不准人们有脑袋,大家服从就得了。这是不行的。共产党现在好像有多少条纪律,不准这个不准那个。我想习仲勋老先生如果活到现在,他大概不会赞成“看齐”这种东西

Tuesday, April 30, 2019

आईएस नेता 'बग़दादी का' नया वीडियो सामने आया

इस्लामिक स्टेट समूह ने एक वीडियो जारी किया है जिसमें दावा किया गया है कि वीडियो में नज़र आ रहा व्यक्ति अबु बक़र अल-बग़दादी है. यदि इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि हो जाती है तो बीते पांच साल में बग़दादी का ये पहला वीडियो होगा.
बग़दादी को आख़िरी बार जुलाई 2014 में देखा गया था. नए वीडियो में बग़दादी ने माना है कि इराक़ में इस्लामिक स्टेट का आख़िरी गढ़ बाग़ुज़ उनके हाथ से निकल गया है.
ये वीडियो इस्लामिक स्टेट के मीडिया नेटवर्क अल-फ़ुरक़ान पर पोस्ट किया गया है. वीडियो अप्रैल में पोस्ट किया गया है, लेकिन ये नहीं मालूम कि इस वीडियो को रिकॉर्ड कब किया गया.
इस वीडियो में बग़दादी ने बाग़ुज़ के साथ-साथ श्रीलंका में ईस्टर संडे के मौके पर हुए हमलों के बारे में भी बात की है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, बग़दादी का कहना है कि इराक़ी शहर बाग़ुज़ में हुए इस्लामिक स्टेट के पतन का बदला लेने के लिए श्रीलंका में ईस्टर संडे के मौके पर हमले किए गए.
बीबीसी के रक्षा मामलों के संवाददाता फ्रैंक गार्डनर के मुताबिक, इस वीडियो का उद्देश्य ये बताना है कि हार के बाद इस्लामिक स्टेट ख़त्म नहीं हुआ है और अपने सिर पर ढाई करोड़ अमरीकी डॉलर के इनाम के साथ उसके नेता अबु बक़र अल-बग़दादी अभी भी ज़िंदा है और पकड़ से बाहर है.
मूल रूप से इराक़ के रहने वाले बग़दादी का असली नाम इब्राहिम अव्वाद इब्राहिम अल-बदरी है. पिछले साल अगस्त में उनकी आवाज़ एक ऑडियो के ज़रिए सामने आई थी.
बीबीसी के मध्यपूर्व संवाददाता मार्टिन पेशेंस का कहना है कि तब ऐसा लगा था कि बग़दादी ने इस्लामिक स्टेट को हुए नुकसान से ध्यान हटाने की कोशिश की है.
लेकिन 18 मिनट के ताज़ा वीडियो में बग़दादी का कहना है, ''बाग़ुज़ की लड़ाई ख़त्म हो चुकी है. इस लड़ाई के बाद बहुत कुछ होना बाक़ी है.''
कुछ वर्ष पहले इस्लामिक स्टेट उस वक्त अपने चरम पर था जब इराक़-सीरिया सीमा के एक बड़े हिस्सा पर उनका नियंत्रण था.
लेकिन साल 2016 में और उसके अगले साल, इराक़ का मोसुल उसके हाथ से निकल गया. साल 2017 के अक्तूबर में सीरिया के रक़्क़ा से भी उन्हें खदेड़ दिया गया था.
कुर्दों की अगुवाई वाली सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज़ का दावा है कि इराक़ का बाग़ुज़ शहर भी अब उनके नियंत्रण में है.
बताया जाता है कि बग़दादी का जन्म साल 1971 में इराक़ के बगदाद शहर के उत्तर में स्थित समारा में हुआ.
कुछ पुरानी रिपोर्टों के मुताबिक़, साल 2003 में जब अमरीकी सेनाएं इराक़ में दाख़िल हुईं, तब तक बग़दादी शहर की एक मस्जिद में मौलवी हुआ करते थे.
साल 2014 की रिपोर्टों के अनुसार, इस्लामी चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट इन इराक़ एंड अल-शाम (आईएसआईएस) ने इराक़ और सीरिया में अपने कब्ज़े वाले इलाक़े में 'ख़िलाफ़त' यानी इस्लामी राज्य की घोषणा की थी.
संगठन ने अपने मुखिया अबु बक़र अल-बग़दादी को 'ख़लीफ़ा' और दुनिया में मुस्लिमों का नेता घोषित किया था.

Tuesday, April 9, 2019

मोदी की चुनावी रैली से क्यों उठकर चले गए मणिपुर के लोग?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंफ़ाल (मणिपुर) रैली का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफ़ी शेयर किया जा रहा है जिसमें दिखाई देता है कि पुलिस के कुछ जवान लोगों को एक दरवाज़े से बाहर निकलने से रोक रहे हैं.
इस वीडियो के साथ लोग लिख रहे हैं कि '2014 में मोदी की रैली में लोग आते थे, 2019 में उन्हें पुलिस के दम पर रोकना पड़ रहा है'.
'मणिपुर टॉक्स' नाम की एक स्थानीय वेबसाइट ने भी यह वीडियो शेयर किया है और लिखा है, "भारी अफ़रा-तफ़री के बीच लोगों को मोदी की रैली में रोके रखने के लिए पुलिस को मेहनत करनी पड़ी. पुलिस ने बैरिकेड लगाकर लोगों को मैदान में रोका. ये शर्म की बात है."
ट्विटर पर इस वेबसाइट के द्वारा पोस्ट किया गया यह वीडियो क़रीब तीन लाख बार देखा जा चुका है और सैकड़ों लोग इसे री-ट्वीट कर चुके हैं.
इनमें कई यूज़र ऐसे हैं जिन्होंने लिखा है कि मोदी के भाषण से निराश होकर मणिपुर के लोग रैली के बीच ही वापस लौटने लगे थे.
सोशल मीडिया पर एक-दो वीडियो ऐसे भी हैं जिनमें दिखाई देता है कि पुलिस ने मैदान का दरवाज़ा बंद कर रखा है और महिलाएं लोहे के दरवाज़े के ऊपर चढ़कर मैदान से बाहर आने की कोशिश कर रही हैं.
रविवार, 7 अप्रैल 2019 को मणिपुर की राजधानी इंफ़ाल में क्या हुआ था और क्या रैली मैदान से निकल रहे लोग वाक़ई मोदी के भाषण से निराश हो गए थे? इसकी हमने जाँच की.
मणिपुर के इंफ़ाल ईस्ट ज़िले के कंगला पैलेस से महज़ एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित हप्ता कंगजेईबुंग मैदान में नरेंद्र मोदी की यह रैली आयोजित हुई थी.
भारतीय जनता पार्टी ने पीएम मोदी का 6 अप्रैल को जो शिड्यूल जारी किया था, उसके अनुसार उन्हें शाम 4 बजकर 10 मिनट पर मणिपुर की इस रैली में पहुँचना था.
लेकिन मणिपुर बीजेपी ने इस रैली का जो पोस्टर जारी किया था, उसमें रैली का वक़्त 2:30 बजे दिया गया था.
रविवार को मोदी की इस रैली को कवर करने पहुँचे कुछ स्थानीय अख़बारों के रिपोर्ट्स ने बीबीसी को बताया कि सुबह 10 बजे से ही लोग रैली मैदान में पहुँचना शुरू हो गए थे.
प्रधानमंत्री के आगमन को देखते हुए रविवार को मणिपुर में सक्रिय भूमिगत चरमपंथी संगठन कोरकोम ने भी सूबे में बंद का आह्वान किया था.
भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के आगमन के विरोध में यह चरमपंथी संगठन पहले भी इस तरह का बंद बुलाता रहा है.
मणिपुर प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता बिजय चंद्र ने बीबीसी के सहयोगी पत्रकार दिलीप कुमार शर्मा को बताया कि पीएम की रैली को लेकर उन्हें काफ़ी चिंता थी.
बिजय चंद्र ने कहा, "सुरक्षा की चिंता के अलावा हमें यह भी फ़िक्र हो रही थी कि बंद के कारण रैली में काफ़ी कम लोग आ पाएंगे. इसीलिए हमने लोगों को ढाई बजे आने का वक़्त दिया था. लेकिन जो दूर-दराज़ के गाँवों से रैली में आये थे वो सुबह 11 बजे ही यहाँ पहुँच गए थे."
कुछ स्थानीय पत्रकारों ने बताया कि रैली में मंच संचालक ऐसे निर्देश दे रहे थे कि 'देश के प्रधानमंत्री किसी भी समय आप लोगों के बीच में होंगे. उनके स्वागत में सब खड़े होंगे और उनका अभिनंदन करेंगे'.
लेकिन इस बीच लोगों में दिन ढलने की चिंता बढ़ रही थी. मणिपुर में शाम 5 बजे के बाद सूरज छिपने लगता है.
ऑनलाइन मीडिया में कुछ ऐसी रिपोर्ट्स छपी हैं जिनमें कहा गया है कि कार्यक्रम में जो देरी हुई उसे लेकर लोगों में नाराज़गी थी. इसे देखते हुए मणिपुर सरकार में मंत्री थोंगम बिस्वजीत ने रैली मैदान में म्यूज़िक बजाने की भी पेशकश की थी.
यू-ट्यूब पर मौजूद एक वीडियो में थोंगम बिस्वजीत को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि 'पीएम मोदी के पास मणिपुर और पूर्वोत्तर भारत के लिए क्या संदेश है, उसे सुनने के लिए थोड़ा तो इंतज़ार करें.'
लेकिन पीएम मोदी अपने तय शिड्यूल से क़रीब डेढ़ घंटा देरी से रैली स्थल पर पहुँचे और इस बीच काफ़ी लोगों ने सीटें छोड़कर मैदान से बाहर जाना शुरू कर दिया था.

Friday, February 22, 2019

كما قال إن تطبيق القانون حمل "غبنا ومضايقة للشباب".

لكن دور المرأة في حركة الاحتجاجات المستمرة منذ نحو شهرين، لم يقتصر على مشاركة المعلومات على صفحات الإنترنت؛ حيث لوحظت نسبة المشاركة العالية للنساء في المظاهرات (نحو 60 بالمئة)، وتحديدا الشابات اللاتي في مقتبل العشرينات، وحتى أصغر من ذلك.
ويثير "قانون النظام العام" استياء كثير من النساء كونه يفرض قيودا على حريتهن أثناء وجودهن في الأماكن العامة، ويمنح رجال الشرطة سلطة تحديد ما هو ملائم وما هو غير ملائم كسلوك ولباس ترتديه المرأة.
وتواجه المرأة بناء على ذلك عقوبة الجلد والغرامة.
يقول أحمد الزبير من منظمة العفو الدولية (أمنستي): "إن كانت هناك فئة عانت في السودان أكثر من غيرها فهي النساء السودانيات، وهذا مرتبط بدرجة كبيرة بقانون النظام العام الذي يستهدف المرأة".
ويضيف أن تحليلات منظمته توصلت إلى "استهداف الشابات الصغيرات" من قبل قوات الحكومة "لأن الحكومة أدركت أن هؤلاء الشابات المتظاهرات يشعرن أن جزءا من الحصول على حريتهن مرتبط بتغيير النظام الحالي".
ويوم 6 فبراير/ شباط، وفي تصريحات وصفت بالـ "مفاجئة" انتقد الرئيس عمر البشير تطبيق قانون النظام العام وقال إنه "خاطئ" و"ضد الشريعة الإسلامية".
كما قال إن تطبيق القانون حمل "غبنا ومضايقة للشباب".
وقال مراسل بي بي سي عربي في السودان، محمد عثمان، إن الحكومة بدأت فعلا بمراجعة هذا القانون من خلال ورشة عمل، وأشار إلى أن ذلك يأتي أيضا بعد "ضغوط أمريكية" تطالب النظام الحاكم بتحسين وضع حقوق الإنسان مقابل رفع اسم السودان من قائمة الدول الراعية للإرهابلكن الفتيات يردن أكثر من إلغاء قانون النظام العام؛ هن يردن الحرية السياسية أيضا.
عندما اتصلت بسناء على رقمها السوداني، قالت لي إنها في السودان، لكنها مختبئة منذ أيام في بيت غير بيتها بسبب خوفها من الملاحقة: "الحرية السياسية في السودان معدومة. فقط لأني قلت شعار 'تسقط بس '، وخرجت في مظاهرة - وهو حق يكفله الدستور - وأتكلم جهرا عن ذلك، أشعر أن حياتي مهددة، وغير قادرة على العودة للبيت. أشعر أني في خطر فقط لأني أوصلت صوتي".
تقول سناء، التي تعرف عن نفسها كناشطة مستقلة لا تنتمي لأي حزب سياسي، إنها تقرأ مقالات صحفية، وتتابع طوال الوقت أفكارا تكتب على تويتر لتفكر بما يجب عليها فعله.
وتؤكد أن "الالتزام بالسلمية سلاحنا"، وتضيف: "لكن صفحة منبرشات تبقى السلاح الأعظم ليس فقط بيد نساء السودان، بل بيد الشعب السوداني خالي اليدين في مواجهة الاعتقال والتعذيب. كنا نسكت، لم يكن بمقدورنا فعل أي شيء. أما عندما نخرج ونصور ونحمّل الصور على المجموعة ونفضحهم، حينها أشعر بأني استرد حق من اعتقل".

Thursday, February 7, 2019

#MeToo में नहीं आया: शत्रुघ्न सिन्हा - पांच बड़ी ख़बरें

बीजेपी सांसद और अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने बुधवार को कहा है कि वह भाग्यशाली हैं कि उनका नाम कभी #MeToo आंदोलन में नहीं आया. उन्होंने कहा कि हर क़ामयाब आदमी की असफलता के पीछे एक महिला होती है.
हालांकि, उन्होंने सफ़ाई देते हुए कहा कि वह #MeToo आंदोलन का मज़ाक नहीं उड़ा रहे हैं और उनकी टिप्पणी को एक 'साफ़ हास्य' के तौर पर लिया जाना चाहिए.
एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में उन्होंने कहा, "आज #MeToo के दौर में यह कहे जाने में बिलकुल शर्म या झिझक नहीं महसूस की जानी चाहिए कि हर क़ामयाब पुरुष की असफलता के पीछे एक महिला होती है. मैं ख़ुद को भाग्यशाली महसूस करता हूं कि तमाम हरकतें करने के बावजूद मेरा नाम #MeToo आंदोलन में नहीं आया."
सिन्हा ने कहा कि उनकी पत्नी पूनम 'देवी' हैं और वह उनकी 'सबकुछ' हैं.
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा रॉबर्ट वाड्रा से पूछताछ किए जाने पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि विपक्ष उनके साथ मज़बूती के साथ खड़ा है.
बनर्जी ने कहा, "यह कोई गंभीर मामला नहीं है, बस हर किसी को यूं ही नोटिस भेज दिया जा रहा है. तो हम साथ खड़े हैं और हम एकजुट हैं."
मुख्यमंत्री बनर्जी ने कहा कि यह चुनाव से पहले जानबूझकर किया जा रहा है.
ग़ौरतलब है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के जीजा रॉबर्ट वाड्रा से बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी के दफ़्तर में क़रीब छह घंटे तक पूछताछ हुई थी.
बीजेपी प्रवक्ता जीएल नरसिम्हा राव ने आरोप लगाया है कि साल 2012 में सेना के कथित तख़्तापलट की ख़बरों के पीछे तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के चार मंत्रियों का हाथ था.
बुधवार को एक अख़बार ने यह दावा किया था कि इस कथित तख़्तापलट के पीछे कांग्रेस के चार मंत्रियों का हाथ था.
इस ख़बर के बाद बीजेपी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से जवाब मांगा है, साथ ही पूरे मामले की जांच संसदीय कमेटी से कराने की मांग की है.
नरसिम्हा राव ने कहा कि कांग्रेस ने सेना के ख़िलाफ़ फ़र्ज़ी ख़बरें छपवाकर उसे बदनाम करने की कोशिश की है.
द संडे गार्डियन की रिपोर्ट में आईबी के अफ़सर के हवाले से कहा गया है कि तख़्तापलट की कोई कोशिश नहीं हुई थी.
रायपुर में पिछले सप्ताह एक पत्रकार को कथित तौर पर बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा पीटे जाने के बाद बुधवार को पत्रकारों ने हेलमेट पहनकर बीजेपी नेताओं से बात की.
बीजेपी नेताओं के कार्यक्रम में पत्रकारों द्वारा हेलमेट पहनकर पहुंचने पर उन्होंने कहा कि वह बीजेपी को एक प्रतीकात्मक संदेश देना चाहते थे और अगर उन पर हमला होता है तो यह उसकी पहले से तैयारी थी.
बीते शनिवर को रायपुर में बीजेपी के ज़िला स्तर के नेताओं की बैठक में पत्रकार सुमन पांडे की पिटाई कर दी गई थी जिससे उनके सिर में चोटें आई थीं.
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ पिछले चार साल अब तक के सबसे गर्म साल रहे. विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने दुनियाभर की सरकारों से ग्रीन हाउस गेसों में कटौती करने की गुज़ारिश की है.
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेश के प्रवक्ता स्टेफान यूजरिक ने कहा, "महासचिव ने विश्व मौसम विज्ञान संगठन के आंकड़े पर चिंता जताई है, जिसके मुताबिक साल 2015-16-17 और 18 अब तक के रिकॉर्ड सबसे गर्म साल रहे.
विश्‍लेषण के मुताबिक 2018 में सतह का वैश्विक औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक आधार रेखा से 1.0 सेल्सियस ज़्यादा रहा. इन आंकड़ों के आने के बाद जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर और तेज़ी से कदम उठाए जाने की ज़रूरत है."